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मेरी पड़ोसन आंटी की चुदाई का राज

by राहुल1 मई 202510 मिनट12 views0 Comments

दोस्तो, मेरा नाम राहुल है और मैं पंजाब का रहने वाला हूं।

आज मैं तुम्हें अपनी जिंदगी का सबसे रोमांचक किस्सा सुनाने जा रहा हूं, जिसे पढ़कर लड़कियों की चूत गीली हो जाएगी और लड़कों का लंड खड़ा हो जाएगा। ये आंटी की हिंदी सेक्स स्टोरी उस वक्त की है जब मैं 12वीं क्लास में पढ़ता था।

उस समय मुझे एक ऐसा मौका मिला जिसमें मैंने अपनी पड़ोसन प्रिया आंटी का पेशाब पिया और उनकी जोरदार चुदाई की। आंटी के बूब्स तरबूज जैसे बड़े थे, कमाल की गांड थी; बिल्कुल दूध जैसा गोरा जिस्म और घने काले बाल।

वैसे तो आंटी दो बेटों की मां थीं, लेकिन मोहल्ले का हर लड़का उनका फैन था। मैं तो अक्सर आंटी को सोचकर मुठ मारता रहता था।

हुआ ये कि मेरे दादा जी की तबीयत बिगड़ गई, तो घरवालों को मुझे अकेला छोड़कर जाना पड़ा क्योंकि मेरी 12वीं की परीक्षाएं चल रही थीं। घरवालों ने मेरी जिम्मेदारी पड़ोस की प्रिया आंटी को सौंपी।

घरवालों के जाने के बाद मैं आंटी के घर पर खाना खाता और रोज की तरह कॉलेज जाता। दो दिन ऐसे ही निकल गए।

तीसरे दिन मैं एग्जाम देकर जल्दी घर लौटा। घर जाकर कपड़े बदले और लंच के लिए आंटी के घर गया। आमतौर पर मैं आवाज लगाकर जाता था, लेकिन उस दिन चुपचाप अंदर चला गया।

घर में कोई नहीं दिखा, तो मैंने पुकारा – आंटी जी, कहां हो?

किचन से आवाज आई – राहुल, खाना तैयार है, बैठ जाओ। मैं आती हूं।

जैसे ही मैं बैठा, मैंने किचन के बाहर की दीवार पर लटकी हुई एक नीली पैंटी और काली ब्रा देखी। आंटी की ब्रा-पैंटी देखते ही मैं खुद को रोक नहीं पाया। मेरा लंड पैंट में तन गया था।

लंड को शांत करने के लिए मैंने झट से पैंटी उतारी और अपने घर ले आया। घर जाकर मैं सोफे पर बैठ गया और आंटी की पैंटी को चूत की तरह कुशन के बीच सेट करके लंड घुसेड़ दिया। ऐसा लगा जैसे मैं आंटी को चोद रहा हूं।

कसम से, मैंने दो बार झटके से पैंटी में अपना पानी गिराया और फिर आंटी के घर वापस गया। जेब में उनकी गंदी पैंटी थी।

लेकिन जैसे ही पहुंचा, मैं हैरान रह गया क्योंकि आंटी सिर्फ एक गाउन में थीं, शायद पैंटी ढूंढ रही थीं। मैं सकपका गया। शायद उन्हें शक हो गया था कि पैंटी गायब होने में मेरा हाथ है, क्योंकि घर में मेरे अलावा कोई नहीं आया था। आंटी के बेटे हॉस्टल में थे और अंकल इंजीनियर थे, शाम को आते थे।

जब आंटी ने कुछ नहीं कहा, तो मैंने सोचा सब ठीक है। खाना खाकर मैं वापस आया और पैंटी को उनके घर में छिपा दिया।

शाम को खाना खाकर मैं वहीं सो गया, क्योंकि अकेले घर में डर लगता था। रात को अजीब आवाजें सुनकर देखा तो अंकल और आंटी सेक्स कर रहे थे, पागलों की तरह एक-दूसरे में समाए हुए। उन्हें देखकर मैं पागल हो गया।

देखा कि आंटी अंकल के सिर को पकड़कर अपनी चूत में घुसा रही थीं। वो गालियां दे रही थीं – हरामी, चाट मेरी चूत को... आज फाड़ दे इसे।

प्रिया आंटी ने चूत अलग की और उस पर शहद डालकर अंकल को इशारा किया। अंकल चूत चाटने लगे और आंटी ने उन्हें चिपका लिया। ये देखकर मैं गर्म हो गया और लंड हिलाने लगा।

आज पहली बार आंटी को ऐसे देखा था। वैसे साड़ी में वो बड़ी संस्कारी लगती थीं, लेकिन सब उनकी गांड के दीवाने थे।

अगली सुबह मैं उठा, नहाकर कॉलेज गया और एग्जाम दिया। लेकिन वो सीन नहीं भूल पा रहा था। सोचता रहा कि आंटी कैसे चूत चुसवा रही थीं।

कॉलेज से लौटकर घर आया, ड्रेस चेंज की और आंटी के घर गया। उनकी छिपाई पैंटी उठाई और घर आकर नंगा होकर फिर पैंटी को चोदने लगा। तभी आंटी मेरे घर आ गईं और मुझे रंगे हाथों पकड़ लिया। वो गुस्से में थीं लेकिन हंस भी रही थीं।

बोलीं – तेरी मम्मी को सब बताऊंगी।

मैंने हाथ जोड़कर कहा – प्लीज माफ कर दो, जो कहोगी वो करूंगा।

"ठीक है... चल खाना खा ले। बाद में देखती हूं।"

खाना खाया लेकिन डर से कुछ निगला नहीं गया। शाम को जाने का मन नहीं था, लेकिन वो मुझे ले गईं। तभी अंकल का फोन आया – मैं लेट आऊंगा, तुम लोग खाकर सो जाना। अगर 11 बजे तक न आया तो कल आऊंगा।

आंटी ने मुझे देखा और मुस्कुराई। हमने खाना खाया और टीवी देखा। 11 बजे तक देखा, फिर आंटी नहाने गईं। उनकी पैंटी-ब्रा दरवाजे पर लटकी थी। मेरा मन हुआ लेकिन डर लगा।

आंटी ने आवाज लगाई – राहुल, बाहर मेरी पैंटी-ब्रा लेकर आना।

मैं डरते हुए गया। दरवाजा खुला और आंटी पूरी नंगी खड़ी थीं। उनकी चूत देखकर मुंह में पानी आ गया। आंटी की गांड हिली तो चूत मुस्कुराई।

बोलीं – क्या देख रहा है? अंदर आ।

मैं सहमा हुआ अंदर गया।

बोलीं – माफ करूंगी अगर आज अंकल का काम तू करे।

मैंने पूछा – कैसा?

उन्होंने बाल पकड़े, मुझे नीचे किया, एक टांग सिंक पर रखी और चूत खोल दी। मेरा सिर चूत में दबा दिया। चूत में रस भरा था। स्वाद लगते ही मैं 'उफ्फ...' करके चाटने लगा। पहली बार चूत की किस की।

आंटी सिसकारियां ले रही थीं। मैं जीभ चलाने लगा, चपर-चपर चाटा। फिर उन्होंने चूत पर शहद टपकाया। चूत मीठी लगी। शीशी चूत में दबाकर शहद भरा।

बोलीं – सब खा ले तो गिफ्ट दूंगी।

मैं जीभ डालकर चाटने लगा।

आंटी बोलीं – चाट साले... पैंटी में क्या हिलाता है, आज चूत में घुस।

गालियां सुनकर लंड तन गया। मैंने चूत खोली, जीभ डाली, गांड पकड़ी और चोदा जीभ से। आंटी बाल पकड़कर साथ दे रही थीं।

बोलीं – इतनी अच्छी चूत चूसते अंकल भी नहीं। चूस जब तक पानी न निकले।

कुछ देर बाद नमकीन पानी आया। मैं हटने लगा लेकिन उन्होंने दबा रखा।

बोलीं – पी जा हरामी... आज मेरा कुत्ता है तू।

डर से मैंने सारा पानी पी लिया। फिर आंटी ने मेरे होंठ चूसे और रस साफ किया। मुझे रूम में ले गईं। मेरा लंड गर्म था।

आंटी ने कपड़े उतारे, मैं नंगा हो गया। आंटी मुस्कुराईं। बेड पर मैं लेटा, वो ऊपर चढ़ीं और किस करने लगीं।

बोलीं – आज अंकल का काम कर।

मैंने हां कहा। वो होंठ चूसने लगीं, लंड दबाने लगीं। लंड कड़क हो गया। फिर चूत से लंड रगड़ा। मैं पागल हो गया।

मैंने धक्का देकर ऊपर आ गया। उनके बूब्स मसले, चूसे, निप्पल काटे। आंटी चिल्लाई – आंह काट मत... प्यार से चूस।

फिर मैं चूत पर आ गया। शहद टपकाकर चुसवाई।

बोलीं – कुत्ते जैसे चाट।

मैं चाटता रहा। फिर बोलीं – अब कुछ और दूंगी। मुझे नीचे लेटाया, मुंह पर बैठीं।

बोलीं – चूत चूस, जो मिले खा ले।

मैं चूसने लगा। कुछ मिनट बाद उनका रज निकला, मैंने तीन बार पानी पिया। फिर बोलीं – सजा मिलेगी, चूत से और आएगा। और पेशाब की धार मुंह में मारी।

घिन लगी लेकिन उन्होंने जबरदस्ती पिलाया। मम्मी की कसम देकर पिलाया। गर्म मूत अच्छा लगा, मैं सारा पी गया।

समझ गईं, बोलीं – मन की इच्छा पूरी की, क्या चाहिए?

मैंने कहा – आपकी चूत चोदनी है।

उन्होंने लंड मुंह में लिया, चूसा। झट से मेरा पानी निकल गया, वो खा गईं।

बोलीं – इतनी क्रीम मत जमा कर।

मैंने कहा – पैंटी में निकालता हूं।

हंसकर बोलीं – अब चुदाई कर। लंड चूसकर खड़ा किया।

बोलीं – डाल दे चूत में।

मैंने कुतिया बनाया, पीछे से रगड़ा। आंटी बोलीं – तड़पा मत, घुसा दे। धक्का मारा, लंड पूरा अंदर।

आंटी चिल्लाई – इतना लंबा अंकल का नहीं।

मैंने कहा – आपकी पैंटी से लंबा किया। गांड हिलाने लगीं। मैं धक्के मारता रहा, बूब्स पकड़े। आंटी साथ दे रही थीं, गालियां देकर चुदवा रही थीं।

दस मिनट बाद उनका पानी निकला। मुझे गिराया, मुंह पर बैठीं – फिर चूस। फिर लंड पर बैठकर चुदवाईं। आधे घंटे में संतुष्ट हुए।

फिर बोलीं – गांड चोद।

मैंने टांगे फैलाईं, तकिया लगाया, लंड पर थूक लगाया। धक्का मारा, लंड घुसा। आंटी चीखी। मैंने होंठ लॉक किए, धक्के मारे। गांड सुजा दी।

मैंने कहा – पानी निकलने वाला।

बोलीं – जहां मन हो निकाल।

मैंने कहा – मुंह में। वो चूसने लगीं, पानी आंखों-बालों पर गिरा। हंसकर हम सो गए।

सुबह किस देकर बोलीं – अगर अंकल न आए तो और कुछ दूंगी।

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राहुल

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