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क्लिनिक की वो रात जो कभी भूल नहीं पाऊंगा

by राहुल31 जनवरी 20268 मिनट7 views1 Comments

दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली के पास एक छोटे से इलाके से हूं, मिडिल क्लास फैमिली, जहां पैसे की तंगी हमेशा रहती है।
वो महामारी के दिन थे, जब सब कुछ बंद था, और मुझे मजबूरी में एक छोटे क्लिनिक में असिस्टेंट की जॉब करनी पड़ी। पैसों की जरूरत थी, नहीं तो मैं कभी वहां नहीं जाता।

क्लिनिक छोटा था, दिन में डॉक्टर आते, रात में सिर्फ इमरजेंसी के लिए। मेरा काम था दवाइयां रखना, पेशेंट्स की हेल्प, और रात की ड्यूटी।
वो जगह मेरे लिए बिलकुल अनजानी थी – चारों तरफ दवाइयों की बोतलें, मरीजों की कराहें, और वो डरावना सन्नाटा। मैं 19 का था तब, लड़कियों या औरतों के आसपास घबराता था, शर्म आती थी।

क्लिनिक में एक सीनियर नर्स थी, नाम था प्रिया। सब उसे 'सिस्टर प्रिया' कहते, उम्र 26 के आसपास, एक स्मार्ट लड़की जो काम में तेज थी।
उसका चेहरा इतना मासूम लगता कि कोई भी उसकी बात मान लेता, लेकिन स्टाफ के साथ वो थोड़ी बॉसी थी। प्रिया गोरी थी, पतली कमर, और वो यूनिफॉर्म में हमेशा प्रोफेशनल लगती।

पहली रात जब मेरी ड्यूटी उसके साथ लगी, तो हमें एक महिला पेशेंट की केयर करनी थी। वो महिला हाल ही में डिलीवरी से आई थी, कमजोर थी।
रात हो चुकी थी, क्लिनिक खाली। प्रिया ने मुझे बुलाया, "राहुल, चलो रूम में।

उसकी ड्रेसिंग चेंज करनी है।" मैं घबरा गया, लेकिन चला गया। रूम में वो महिला बेड पर लेटी थी, आंखें बंद, उम्र 35 के करीब।
उसके ऊपर शीट थी। प्रिया ने कहा, "ये अभी रेस्ट में है।

शीट मत हटाना पूरी तरह, सिर्फ जरूरत भर।" हमने पर्दे बंद किए। प्रिया ने एक बैग से नए कपड़े निकाले – एक सॉफ्ट नाइट सूट और अंडरगारमेंट्स।
"अब कमर तक शीट सरका।" मैंने किया, वो एक पुरानी स्कर्ट में थी। प्रिया बोली, "धीरे से स्कर्ट नीचे कर, लेकिन प्राइवेसी रख।" मेरे हाथ कांप रहे थे, पहली बार किसी अनजान औरत को ऐसे टच कर रहा था।

स्कर्ट अटक रही थी, मैं परेशान हो गया। क्लिनिक का माहौल और डरावना था – बाहर से कभी किसी की सिसकी आ जाती, कोई खबर कि किसी ने दम तोड़ दिया।
प्रिया ने मेरी हालत देखी, "तुम इतना घबरा क्यों रहे हो? चलो, मैं संभालती हूं।

तुम बाहर से दवाई लाओ।"
मैं बाहर गया, दवाई लेकर आया। तब तक प्रिया ने काम कर लिया था।
हमने मिलकर उसे नाइट सूट पहनाया, रूम सेट किया, और फैमिली को बुलाया। प्रिया की स्किल्स कमाल की थीं – सब इतनी सफाई से किया कि मुझे कुछ गलत नहीं लगा।

मैं सोच रहा था, मैं लड़का हूं, लेकिन हर वक्त लस्ट में नहीं डूबना चाहता। प्रिया इंसानियत और ड्यूटी को बैलेंस करना जानती थी।
ड्यूटी खत्म हुई सुबह 7 बजे। हम थक चुके थे।

प्रिया बोली, "जल्दी निकलते हैं, वरना दिन की शिफ्ट लग जाएगी। तुम चाय बना लो, मैं कपड़े चेंज कर लूं।" मैं किचन में गया।
वापस आया तो प्रिया के यूनिफॉर्म बाहर पड़े थे, वो पर्दे के पीछे चेंज कर रही थी। साइड में एक मिरर था, और उसमें सब दिख रहा था।

प्रिया की स्किन सिल्क जैसी, बूब्स मीडियम, पिंक निपल्स पॉइंटेड, हिप्स 28 साइज के, वेस्ट 22 की, और नीचे हल्के बालों वाली चूत। वो कपड़े उतार रही थी, और उसकी जवानी चमक रही थी।
मेरे मुंह सूख गए, जीभ फेरी। उसके बाल बंधे थे, होंठ पतले, आंखें छोटी – जैसे कोई अनछुआ फल।

प्रिया ने पहले ब्रा पहनी, फिर पैंटी, उसके बाद एक लाइट ड्रेस जो उसके कर्व्स को हल्का शो कर रही थी। बाहर आई तो कॉलेज गर्ल लग रही थी।
हमने चाय पी, "तुम अच्छे हो राहुल, लेकिन थोड़ा कॉन्फिडेंट बनो।" समय हो गया, स्टाफ आने लगा। प्रिया बोली, "चलो, निकलते हैं।

डॉक्टर आएंगे तो रोक लेंगे।" मेरे पास बाइक थी, प्रिया बोली, "मुझे ड्रॉप कर दो।" मैंने किया। घर पर उतरते हुए वो मुस्कुराई, "रात को टाइम पर आना, राहुल।" मैं घर गया, सोया, लेकिन सपने में वही सीन – प्रिया नंगी।
अगली रात क्लिनिक पहुंचा, काम कम था। मरीज सोए थे।

हम एक खाली रूम में बैठे। मैं फोन पर वीडियो देख रहा था।
प्रिया की आवाज आई, "कुछ अच्छा देखा?" मैं चौंक गया, "क... क्या?" प्रिया होंठ काटते हुए बोली, "कुछ नहीं।" मैं फिर वीडियो पर फोकस करने लगा, लेकिन नजर प्रिया पर।

उसकी स्कर्ट घुटनों तक, कोट में पैर हिला रही थी। प्रिया बोली, "इधर बेड पर बैठो मेरे पास।" मैं घबराकर बैठा।
उसकी आंखों में कुछ था। मेरी जांघ पर हाथ रखा, "वो सीन...

पसंद आया?" मैं पानी निगल गया, "कौन सा?" प्रिया चिढ़ी, "सुबह चाय क्यों गिराई थी तुमने? पता है?" मेरा दिमाग सुन्न।
प्रिया ने मेरा हाथ अपनी जांघ पर रखा, "उफ्फ, कितनी सॉफ्ट है न?" मैं कंफ्यूज, क्या करूं? प्रिया उठी, दरवाजा बंद किया, कोट फेंका मेरे ऊपर, "राहुल, आज तेरी ये शर्म उतारती हूं।" मैं सोच रहा था, सुबह का वो सीन मुझे उकसा रहा था, लेकिन इतनी जल्दी?

प्रिया ने कोट हटाया, पैर फैलाकर मेरे ऊपर बैठ गई, मुझे पीछे धकेला, लेटकर होंठ मेरे होंठों से जोड़ दिए। मेरे घुटने मुड़े थे, प्रिया ने टांगें सीधी कीं, हाथ पीठ पर ले गई।
उसकी नोज रिंग चुभ रही थी, लेकिन वो गर्मी... कमाल थी।

पहली बार कोई लड़की मुझे ऐसे कंट्रोल कर रही थी। प्रिया ने ऊपर का होंठ चूसा, फिर नीचे का, मैंने जीभ दी, उसके पतले होंठ मेरे मोटे होंठों में फिट हो गए।
मुझे अपने होंठ पहले पसंद नहीं थे, लेकिन लड़कियां कहती हैं चूसने में मजा आता है। प्रिया को भी लग रहा था, वो नहीं हट रही थी, सांस अटक रही थी, लेकिन मैं भी नहीं हटाना चाहता।

मैंने हाथ से उसकी गांड सहलाई, कपड़ों पर से दरार में उंगली फेरी। करीब 10 मिनट होंठ चूसे, मुंह का रस मिल गया।
मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू किए, वो मेरे। ब्रा उतारी, निपल्स मेरे मुंह से रगड़े, मैंने चूमा, चूसा।

प्रिया बोली, "हां, ऐसे... सीख रहे हो तुम।" आवाज दबी, बाहर न जाए।
मेरा फोकस उसके बूब्स पर, निपल्स पी रहा था। मैंने पलटना चाहा, वो बोली, "मुझे नीचे नहीं लाना, मुझे ऊपर रहना पसंद।"
मैंने हथियार सरेंडर कर दिए।

प्रिया का एक्सपीरियंस दिख रहा था, पैंटी में चूत मेरे लंड पर रगड़ी। मुझे उठाया, कंधे पर हाथ रखे, पीछे झुककर घिसा, मेरा 7 इंच का लंड तन गया।
प्रिया बेड पर खड़ी हुई, मैंने पैंटी नीचे की, उसकी गीली चूत मेरे मुंह के सामने। चाटने का मन नहीं, सोचा कहीं कह न दे।

प्रिया ने उंगलियां मुंह में चूसी, मेरे चेहरे पर लगाई, मुस्कुराई, लंड निकालने का इशारा किया। मैंने निकाला, सख्त था।
प्रिया धीरे बैठी, शैतानी स्माइल। चूत लंड छूई, मैंने पकड़ा, वो सीधा बैठ गई, पूरा अंदर।

प्रिया ने गाल चूमा, "अच्छा लड़का।" होंठ जोड़े, लंड पर उछलने लगी। उसकी दबी सिसकारी, "उंह...
इतना अच्छा लग रहा है।" उछलती रही, होंठ रगड़ती। "हां...

जारी रख... राहुल।" वो झड़ गई, मेरे कंधे पर गिरी, सांस ली।
मेरा लंड खड़ा था। प्रिया बोली, "चिंता मत कर, तुझे पूरा करूंगी।" उठी, मुझे धकेला, लंड चूसा, दांतों से हल्का काटा।

मेरी सिसकारी निकली, उसे मजा आया। चूत का रस साफ किया, तेज चूसना शुरू।
"ओह... प्रिया...

हां।" मैं बाल सहला रहा था, पानी निकल गया उसके मुंह में। मैंने बाल पकड़े, गले तक धकेला, वो हटने की कोशिश करती रही, मैंने पिचकारी मारी।
छोड़ा तो गुस्से से देखा, लेकिन क्यूट थी। गांड पर थप्पड़ मारा, मेरी आह निकली।

कपड़े ठीक किए, मुंह पकड़ा, "किसी को बताया तो ठीक नहीं।" इधर-उधर देखी, होंठों पर काटा, खून निकला। बोली, "मुझे अपनी निशानी हर जगह छोड़नी आती है।" कमरे से निकल गई।
दोस्तों, वो रात मेरी जिंदगी बदल गई। अगर तुम्हें पसंद आई, तो अपनी स्टोरीज शेयर करो

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राहुल

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