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मेरे भाई के साथ छुपी हुई गंदी रातें Hindi Sex Stories

by प्रिया12 फ़रवरी 20259 मिनट1,28,339 views0 Comments

हाय दोस्तों, मैं प्रिया हूं। उम्र 21 साल, कॉलेज की स्टूडेंट। मेरा फिगर 34-28-36 है, गोरी चमड़ी, लंबे काले बाल, और मुझे टाइट कपड़े पहनने की आदत है। मेरे टाइट टॉप और मिनी स्कर्ट मेरे कर्व्स को इतना उभारते हैं कि कॉलेज में लड़के मेरे पीछे लाइन लगाए रहते हैं। मेरे पापा विजय 45 साल के, मम्मी रीता 40 की, और मेरा भाई अजय 23 का – जो कॉलेज में मेरे साथ ही पढ़ता है। वो लंबा-चौड़ा है, जिम जाता है। घर में वो हमेशा मुझसे ज्यादा क्लोज रहता था।

दो महीने पहले नानी की तबीयत खराब हो गई, मम्मी-पापा उनके पास चले गए। घर पर सिर्फ मैं और अजय रह गए। धीरे-धीरे अजय की नजरें मुझ पर बदलने लगीं। वो कहता –

"प्रिया, तू कॉलेज में इतनी टाइट कपड़े क्यों पहनती है? लड़के तुझे घूरते होंगे न?"

मैं हंसकर टाल देती। लेकिन रात को उसकी नजरें मेरे दिमाग में घूमतीं।

एक शाम करीब सात बजे अजय ने मुझे अपने कमरे में बुलाया। मैंने नीला टाइट टॉप और सफेद मिनी स्कर्ट पहनी थी। उसके सामने शराब की बोतल थी। उसने कहा –

"प्रिया, इधर आ, मेरे पास बैठ।"

मैं बैठ गई।

"ड्रिंक ट्राई करेगी?"

मैंने मना किया –

"नहीं भाई, मैं नहीं पीती।"

अजय ने पेग बनाकर थमा दिया। पहला घूँट लिया तो गला जला। अजय बोला –

"पी, प्रिया, ये जिंदगी का मजा है।"

पहला पेग खत्म होने तक मेरी आंखें चढ़ने लगीं। मैं बोली –

"भाई, ये शराब तो कमाल की चीज है!"

अजय ने सिगरेट जलाई और मुझे थमाई –

"ले, शराब का मजा सिगरेट के साथ दोगुना हो जाता है।"

मैंने कश खींचने लगी। अजय मेरी स्कर्ट की तरफ देख रहा था। मैंने पूछा –

"भाई, आप बार-बार मेरी स्कर्ट में क्या ताक रहे हो?"

वो बोला –

"प्रिया, मैं तो तेरी चुचियों को देखने की कोशिश कर रहा हूं।"

मेरे गाल लाल हो गए। मैं शरमाकर अपने कमरे में भाग गई। लेकिन उस रात अजय की बातें दिमाग में घूमती रहीं।

अगले कुछ दिन अजय की हरकतें बढ़ती गईं। वो रोज शराब पिलाता, गंदी बातें करता। मैं नशे में खुलने लगी। वो कहता –

"प्रिया, तेरी ये जांघें तो मस्त हैं, इन्हें सहलाने का मन करता है।"

मैं बोल पड़ती –

"भाई, आप तो कॉलेज के लड़कों से भी तेज निकले!"

कभी वो मेरी चुचियों को हल्के से दबाता, कभी मेरा हाथ अपने लंड पर रख देता।

एक रात हम फिर शराब पी रहे थे। अजय बोला –

"प्रिया, तेरी ये चुचियां तो बिल्कुल रसीली हैं, इन्हें चूसने का मन करता है।"

मैं नशे में थी, मेरी चूत गीली हो रही थी। मैंने मन में ठान लिया कि आज अजय से चुदवाऊंगी।

अजय बाथरूम गया। मैंने स्कर्ट और टॉप उतार दिया। सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। अजय लौटा तो दंग रह गया। मैं बोली –

"भाई, रोज कपड़ों में शराब पीती हूं, आज नंगी होकर पीऊंगी।"

अजय मुझसे लिपट गया। उसके होंठ मेरे होंठों पर, जीभ अंदर। फिर उसने मेरी ब्रा खोली, चुचियां दबाईं। वो बोला –

"प्रिया, अब तू जवान हो गई है। आज तुझे असली मजा दूंगा।"

मैंने कहा –

"भाई, मैंने इतना दिखा दिया, अब आप भी तो कुछ दिखाओ।"

अजय ने कपड़े उतार दिए। उसका मोटा लंड मेरे सामने खड़ा था। मैं दंग रह गई।

अजय ने मेरी पैंटी नीचे खींची। मैं पूरी तरह नंगी थी। वो मेरी जांघों पर जीभ फिराने लगा, फिर चूत चाटने लगा। मैं चिल्ला रही थी –

"आह्ह... भाई... और चाटो... उह्ह..."

उसने उंगली अंदर डाली। फिर लंड चूत पर रखा और बोला –

"चोदूं प्रिया?"

मैंने कहा –

"पेल दो भाई, पूरी ताकत से पेल दो!"

एक झटके में पूरा लंड अंदर। मैं चीखी। अजय धक्के मारने लगा। फिर पीछे से चूत में पेला। मैं गांड उछाल-उछाल कर साथ दे रही थी –

"आह्ह... भाई... चोदो... और जोर से..."

करीब 15 मिनट बाद अजय ने चूत में माल छोड़ दिया। हम दोनों हांफते हुए लेट गए।

थोड़ी देर बाद नंगे ही शराब पीने लगे। अजय बोला –

"प्रिया, तेरी ये हरकतें बता रही हैं कि तू पहले भी चुद चुकी है।"

मैंने हंसकर कहा –

"हां भाई, जब आप अपनी बहन की चूत फाड़ सकते हो, तो आपकी बहन क्यों नहीं चुदवा सकती?"

अजय बोला –

"आज मैं तेरी गांड मारूंगा।"

मैंने कहा –

"भाई, अगर आप मेरी गांड मारोगे तो मेरी चूत का क्या होगा?"

अजय ने मेरी गांड में उंगली डाली। दर्द हुआ लेकिन फिर मजा आने लगा। उसने लंड गांड में धीरे-धीरे घुसाया। मैं चिल्ला रही थी –

"आह्ह... भाई... और जोर से..."

उस रात के बाद सुबह ग्लानि हुई। मैंने अजय से बिना बात किए कॉलेज निकल गई। शाम को अजय ने फिर बुलाया। वो बोला –

"प्रिया, इसमें गलत क्या है? ये भाई-बहन की जरूरत है।"

उसने शराब थमाई। मैंने घूंट लिया और फिर अपने रंग में आ गई। मैंने पूछा –

"भाई, कल रात कैसा लगा?"

अजय बोला –

"प्रिया, तेरी चुदाई से ज्यादा मजा तेरी बेशर्मी में आया। आज तुझे तेरी बेशर्मी का असली इनाम मिलेगा।"

अजय ने मुझे बाथरूम में नंगी होने को कहा। मैं नंगी होकर लौटी तो देखा – अजय और दो नौकर विजय-मोहन नंगे खड़े थे। अजय ने मुझे खींच लिया और बोला –

"कल तू कह रही थी तेरी चूत का क्या होगा? आज तेरी चूत, गांड और चुचियां सबकी खैर नहीं।"

अजय ने मुझे कुर्सी पर बिठाया। मैंने विजय का लंड मुंह में लिया। मोहन पीछे से गांड में उंगली डालने लगा। अजय ने मोहन से कहा –

"इसकी गांड में अपना लंड पेल दे।"

विजय ने गांड में घुसाया। मोहन ने मेरा मुंह अपने लंड से भर दिया। अजय बोला –

"कैसा लग रहा है मेरी रंडी बहन?"

मैंने कहा –

"भाई, साले, मेरी चूत में अपना लंड पेल दो।"

अजय ने चूत में लंड घुसा दिया। अब मैं एक साथ चूत और गांड मरवा रही थी। करीब 20 मिनट बाद हम चारों झड़ गए। जब तक मम्मी-पापा नहीं आए, हम चारों ऐसे ही मजे लेते रहे।

दोस्तों, इस कहानी के बारे में अपनी राय जरूर देना।

#देसी#Hindi Sex Stories#भाई-बहन#प्रिया#अजय#गुप्त

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