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सास-दामाद की अगली मुलाकात - प्रेग्नेंसी के दौरान छुपी चुदाई की रात पार्ट 2 - सास-दामाद अफेयर प्रेग्नेंसी सेक्स Hindi Sex Stories

by रिया18 मार्च 20258 मिनट96,622 views0 Comments

दोस्तों, पिछली स्टोरी में मैंने बताया था कि कैसे मेरी और राज की गलती से मैं गर्भवती हो गई। अब दो महीने बीत चुके हैं। पेट थोड़ा-सा उभरा है, लेकिन अभी बाहर से दिखता नहीं। डॉक्टर ने कहा है कि पहले तीन महीने सब नॉर्मल है, बस ज्यादा जोर-शोर वाली चीजें मत करना। लेकिन दोस्तों, राज का लंड देखते ही मेरी चूत में आग लग जाती है। वो आग अब और भड़क रही है, क्योंकि प्रेग्नेंसी में हॉर्मोन्स की वजह से वासना और बढ़ गई है।

प्रिया आज सुबह ऑफिस गई थी। वो अब भी काम करती है, क्योंकि उसकी प्रेग्नेंसी अभी शुरू हुई है और वो फिट है। घर में सिर्फ मैं और राज थे। राज ने छुट्टी ली थी, कहकर कि "माँ जी की देखभाल करनी है।" मैं समझ गई थी कि देखभाल का मतलब क्या है।

सुबह 10 बजे प्रिया निकलते ही राज मेरे कमरे में आ गया। मैं किचन में चाय बना रही थी, सिर्फ एक लूज टी-शर्ट और शॉर्ट्स में। पेट पर हल्का-सा उभार था। राज पीछे से आया, मेरी कमर पर हाथ रखा और धीरे से बोला, "माँ जी, आज तो आप और भी हॉट लग रही हो। पेट देखकर मन करता है और जोर से चोदूँ।"

मैं शरमा गई, लेकिन चूत में गुदगुदी हो गई। मैंने चाय का कप रखा और मुड़कर उसे किस किया। उसके होंठ गर्म थे। वो मुझे किचन काउंटर पर टिका दिया और मेरी टी-शर्ट ऊपर कर दी। मेरी चूचियाँ अब और भरी हुई लग रही थीं—प्रेग्नेंसी में बढ़ गई थीं। वो दोनों चूचियाँ दबाने लगा, निप्पल चूसने लगा। "आह... राज... धीरे... उह... कितना अच्छा लग रहा..." मैं सिसकार रही थी।

वो घुटनों पर बैठ गया, मेरी शॉर्ट्स नीचे सरकाई। मेरी चूत पर अब भी घने बाल थे, लेकिन वो बिना रुके जीभ डालने लगा। प्रेग्नेंसी में चूत ज्यादा सेंसिटिव हो गई थी। उसकी जीभ भगनासा पर घूमती तो मैं उछल पड़ती। "आह... राज... और चाटो... उह... मेरी चूत तरस रही है..." मैंने उसके सिर को दबाया। चूत से पानी निकलने लगा, वो सब चाट रहा था।

फिर वो उठा, अपनी पैंट उतारी। उसका लंड पहले से ही खड़ा था—मोटा, नसों वाला। मैंने हाथ में लिया, सहलाया। "राज... आज धीरे करना... पेट पर दबाव नहीं पड़ना चाहिए।" वो मुस्कुराया, "माँ जी, मैं संभाल लूँगा।"

वो मुझे बेडरूम में ले गया। मुझे बिस्तर पर लिटाया, पैर फैलाए। धीरे से लंड मेरी चूत पर रगड़ा। मैं तड़प रही थी, "डाल दो... बस धीरे..." उसने धीमा धक्का मारा। लंड अंदर गया, लेकिन आधा ही। मैंने आह भरी, "आह... हाय... कितना अच्छा... और अंदर..." वो धीरे-धीरे पूरा अंदर कर रहा था। थप-थप की हल्की आवाज। मैं अपनी गांड ऊपर उठा रही थी, साथ दे रही थी।

"माँ जी... तुम्हारी चूत अब और टाइट हो गई है... आह... मजा आ रहा..." वो बोला। मैंने कहा, "हाँ राज... तेरे लंड ने ही तो ये किया... उह... और जोर से... लेकिन धीरे..." वो धीमे लेकिन गहरे धक्के मार रहा था। मेरी चूचियाँ उछल रही थीं। वो एक हाथ से मेरे पेट पर हल्का रख रहा था, जैसे बच्चे को महसूस कर रहा हो।

फिर उसने मुझे गोद में उठाया—उठक-बैठक स्टाइल। मैं उसकी गोद में थी, लंड गहराई तक। मैं ऊपर-नीचे हो रही थी, वो मेरी चूचियाँ चूस रहा था। "आह... राज... चूसो... उह... कितना मजा..." सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। प्रेग्नेंसी में चूत ज्यादा गीली थी, लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था।

कुछ देर बाद मैंने कहा, "राज... अब पीछे से... लेकिन धीरे..." वो मुझे घोड़ी बनाया, लेकिन पेट नीचे रखकर। पीछे से धीरे लंड डाला। मैंने तकिए में मुँह दबाया, "आह... राज... गहरा... उह..." वो मेरी गांड पर हल्के थप्पड़ मार रहा था, चूत में धक्के दे रहा था। उसका एक हाथ मेरे पेट पर, दूसरा चूत पर सहला रहा था।

मेरा पानी निकलने वाला था। "राज... मेरा आने वाला है... आह..." मैंने चीखा। वो तेज हुआ, लेकिन कंट्रोल में। मेरा पानी निकला, चूत सिकुड़ गई। वो भी रुक नहीं पाया। "माँ जी... मैं भी... आह..." और उसने मेरी चूत में ही झड़ दिया। गर्म रस अंदर महसूस हुआ।

हम दोनों थककर लेट गए। वो मेरे पेट पर हाथ फेर रहा था। बोला, "माँ जी, ये बच्चा हमारा है... मुझे बहुत खुशी है।" मैंने मुस्कुराकर कहा, "हाँ राज... लेकिन प्रिया को कब बताएँगे?" वो बोला, "जब सही समय आएगा। अभी बस मजे लो।"

उस दिन के बाद भी मौके मिलते हैं। प्रिया जब ऑफिस जाती है, हम चुदाई करते हैं। अब मेरी प्रेग्नेंसी चार महीने की हो गई है, लेकिन राज का लंड देखकर अभी भी चूत गीली हो जाती है। मैं जानती हूँ ये गलत है, लेकिन ये सुख छोड़ नहीं पा रही।

अगली स्टोरी में बताऊँगी कि प्रिया को कैसे पता चला और क्या हुआ।

आपकी राय? क्या ये सिलसिला जारी रहना चाहिए या रुक जाना चाहिए? कमेंट में बताओ।

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